Rama Setu – The living proof of ramayana from 5076 BCE

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भगवान राम की सु्ग्रीव से मित्रता होने के बाद हनुमान जी वानरों की टोली लेकर सीता की खोज में चल पड़े। जब पता चल गया कि सीता को लंका का राजा रावण हरण करके ले गया है तो सबसे बड़ी चुनौती थी कि वानर सेना को लेकर 1500 किलोमीटर लंबे समुद्र को किस तरह पार किया जाए।

 

After having god ram and sugriv befriend together, shri hanuman moved on to find sita along with monkey army. When they got to know that ravan is the one who abducted sita; biggest trouble was to cross this 1500 kms ocean between them and lanka with huge monkey army.

बहुत सोच विचार करने के बाद यह तय हुआ कि समुद्र पर पुल बनाया जाए। बाल्मिकी रामायण के अनुसार भगवान राम ने सबसे पहले सागर का निरिक्षण किया की किस स्थान से पुल बनाना आसान होगा। इसके बाद पुल का निर्माण कार्य आरंभ हुआ।

After a lot of contemplation, they decided to mount a bridge on ocean. According to valmiki ramayan god ram inspected the right place to start making bridge from. Then monkey and bear army started to make bridge.

लेकिन परेशानी यह आई कि जो भी पत्थर समुद्र में डाले जाते सभी डूब जाते। इससे वानर सेना में निराशा बढ़ने लगी। तब भगवान राम ने सागर से प्रार्थना शुरू की। सागर से कहा कि वह पुल निर्माण के लिए फेंके गए पत्थरों को बांधकर रखे। लेकिन सागर ने श्रीराम की विनती नहीं सुनी।

But it remained difficult to bind bridge because as soon as they install a stone on water, it sank.  Army started to get disappointed. Then god ram prayed to ocean. He requested ocean to keep stones above water. But ocean stood still and did not pay heed to Lord Rama’s request.

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